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मध्यप्रदेश से ताल्लुक रखने वाले एण्डटीवी के कलाकारों – शुभांगी अत्रे, कामना पाठक, सारा खान और सारिका बहरोलिया ने ‘नेशनल टूरिज्म डे‘ पर मध्यप्रदेश की तारीफ की
नेशनल टूरिज्म डे (राष्ट्रीय पर्यटन दिवस) पर एण्डटीवी के सितारे अपने गृहनगर और अपने प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गंतव्यों को याद कर रहे हैं। यह सितारे हैं ‘भाबीजी घर पर हैं‘ की अंगूरी भाबी (शुभांगी अत्रे), ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ की राजेश (कामना पाठक), संतोषी माँ सुनाएं व्रत कथाएं‘ की असुर रानी पाॅलोमी (सारा खान) और ‘गुड़िया हमारी सभी पे भारी‘ की गुड़िया (सारिका बहरोलिया)।
यह अवसर सांस्कृतिक विविधता और मनमोहक आतिथ्य-सत्कार वाले भारत के कई शहरों का उत्सव मनाता है और उन्हें एक अलग पहचान देता है। सारा खान ने भोपाल में बिताये अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा, ‘‘भोपाल की मेरे दिल में एक खास जगह है। मैं वहां पैदा हुई और पली-बढ़ी; मैंने उसे एक छोटे से कस्बे से एक अच्छी तरह स्थापित शहर के रूप में बढ़ते देखा है। इस बात पर मुझे गर्व है कि वह मेरा गृहनगर है और मैं वहाँ के निवासियों से उसकी देखभाल करने और उसकी धरोहर को बनाये रखने का आग्रह करती हूँ। भोपाल मेरा गृहनगर होने के अलावा अपने समृद्ध इतिहास के कारण एक आकर्षक पर्यटन स्थल भी है। साँची के स्तूप भोपाल की महत्वपूर्ण जगहों में से एक हैं।’’
शुभांगी अत्रे ने इंदौर के अपने पसंदीदा फूड्स के बारे में बताया, ‘‘यह बात ज्यादा लोग नहीं जानते हैं कि मैं दिल से खाने-पीने की चीजों की बड़ी शौकीन हूँ। जब भी मैं इंदौर की किसी नई जगह जाती हूँ, स्थानीय क्विजीन की हर चीज चखती हूँ और दूसरी चीजें भी आजमाती हूँ। क्विजीन मेरे लिये सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्लासिक और विश्व-प्रसिद्ध पोहा से लेकर स्टेपल फूड दही वड़ा तक, यह चीजें मेरे मुँह में पानी ला देती हैं! इंदौर के लोग किसी भी व्यंजन को एक झटके में साफ करना तो जानते ही हैं, उनका आतिथ्य-सत्कार भी दिल को खुश कर देने वाला होता है। वहाँ के लोग खुली बाहों से आपका स्वागत करते हैं और पर्यटक को घर जैसा अनुभव होता है।’’
टूरिज्म डे के अवसर पर कामना पाठक ने भी इंदौर के लिये अपना प्यार जताते हुए कहा, ‘‘इंदौर का आर्किटेक्चर और स्मारक भव्यता से भरे हैं। इंदौर में आपको खास तरह का नाश्ता मिलता है और सुबह-सुबह बेहिसाब जलेबियाँ किसी और जगह नहीं मिलती हैं! मुझे सर्राफा बाजार में घूमना और वहाँ की आर्ट एवं क्राफ्ट वाली चीजें खरीदना पसंद है। इंदौर अपनी जड़ों से जुड़ा है, फिर भी भारत के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में से एक है। अपनी स्वच्छता के लिये मशहूर इस शहर और उसकी सरकार ने उसे वहाँ के निवासियों और घुमंतू आगंतुकों के लिये एक प्राइम लोकेशन बना दिया है।’’
सारिका बहरोलिया बेहद उत्साह के साथ ग्वालियर के बारे में बताती हैं, ‘‘ग्वालियर मेरा गृहनगर है, यहां की आबोहवा मेरा मन मोह लेती है। शहर में कुछ बेहद उत्कृष्ट एवं देशी जानवर और इमारतें हैं। ग्वालियर अपने महलों और मंदिरों के लिए विख्यात है, खासतौर से सास बहू का मंदिर, जोकि एक बेहद सूक्ष्मता से बनाया गया हिंदू मंदिर है। ग्वालियर का प्राचीन किला बलुआ पत्थर से बना है और पूरे शहर पर नजर रखता है। ऐतिहासिक रूप से, शहर में कई साम्राज्य विकसित हुए और उनका प्रभाव राजसी संरचनाओं में साफ नजर आता है जोकि शहर पर अपना प्रभुत्व बनाए हुए हैं। कोई भी कह सकता है, ग्वालियर ने मध्यकालीन गौरव को अभी भी बरकरार रखा है।‘‘


