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सब्र का दामन थाम कर हर हाल में खुदा का शुक्र अदा करेंः सैयदना
सैफीनगर में मोहरर्म के अशरा मुबारका की पांचवी वआज में सैयदना साहेब ने फरमाया
इंदौर। दाऊदी बोहरा समाज के 53 वे धर्मगुरु सैयदना आली कदर मुफ्फद्दल मौला ने मोहर्रम के अशरा मुबारका की पांचवी वआज रविवार को सैफीनगर मस्जिद में फरमाई।
सैयदना साहेब ने वाअज में फरमाया की सुुुख हो या दुख हो, परेशानिया हो या बीमारियां हो, कैसे भी हालात हो हमेशा सब्र का दामन थाम कर सब्र करते हुए हर हाल में खुदा का शुक्र अदा करते रहो। सब्र करने व शुक्र अदा करते रेहने से खुदा गुनाहो को माफ कर रहमते व बरकते अता करता है।
सैयदना साहेब ने वाअज मे 51 वे धर्मगुरु डाॅ सैैयदना ताहेर सैफुददीन मौला की शानात की जिक्र फरमाई एवं 52 वे धर्मगुरु डाॅ सैैयदना मोहम्मद बुरहानुददीन मौला के नुरानी व दुआईया कलेमात फरमाते हुऐ फरमाया की 52 वे धर्मगुरु सैयदना मोहम्मद बुरहानुददीन मौला ने कौम को ऐसे नाज़ो से पाला के हर समाजवासी की जिंदगी बेहतर व सुकुन की हो गई। दुनिया की तमाम बुराईयो से कौम को दुर कर दिया।
बुरहानुददीन मौला की जिक्र आते ही समाजवासीयो ने बुरहानुददीन मौला को याद कर ” कैसे भुले बुरहानुल हुदा को, याद आती है ऐहले वला (समाज) को ” एक स्वर में बुलंद आवाज के साथ सभी समाजवासियों ने पढ़ा।
सैयदना साहेब ने वाअज में पैगंबर इस्लाम मोहम्मद रसूलिल्लाह (स.स.) की शानात के बयान फरमाते हुए कहा की मोहम्मद रसूलिल्लाह (स.स.) आखरी नबी थे, आपने शरियते इस्लाम दी जिसकी पाबंदी फर्ज है। शरियते इस्लाम मे इंसानियत की भलाई का पैगाम है। ईमान के रास्ते पर चलने की तौफिक है।
समाज की जनसंपर्क समिति के मीडिया प्रभारी मजहर हुसैन सेठजी वाला व सदस्य बुरहानुददीन शकरुवाला ने बताया की सैयदना साहेब ने वाअज में करबला में शहीद जनाबेे अब्बास अलमदार की शहादत पढ़ी। इस अवसर पर हर आँख अश्कबार हो गई। या अब्बास, या हुसैन की सदा के साथ पूरजोश मातम हुआ।
सैयदना साहेब ने पैगंबर इस्लाम मोहम्मद रसूलिल्लाह (स.स.) की वफात एवं इमाम हुसैन की शहादत पढ़ी इस अवसर पर अश्क बार आँखो से या हुसैन या हुसैन की सदा के साथ पूरजोश मातम हुआ। सैयदना साहेब ने सभी के लिए दुआ फरमाई।
जनसंपर्क समिति के मीडिया विभाग के सदस्य मोहम्मद पिठावाला व इकबाल चप्पू ने बताया की रविवार को देश विदेश से बड़ी संख्या में समाजवासी इंदौर पहुँचे। सैफीनगर सहित सभी बोहरा बहुल क्षेत्रों में समाजवासियों का भारी जमावड़ा था ।


