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सिकलसेल के सफाए के लिए, जरूरी है अवेयरनेस एंड इन्फार्मेशन की ए.आई.
देश के प्रख्यात चिकित्साविद् डॉ. ए.के. द्विवेदी ने सिकल सेल के खिलाफ जगाई जन-जागरूकता अलख
इंदौर/रीवा “सिकल सेल एक आनुवंशिक विकार है। इसके पूरी तरह सफाए के लिए समुचित चिकित्सा के साथ-साथ जागरुक रहकर नियमित रूप से इससे जुड़ी नवीनतम जानकारी के बारे में जानना एवं उनका फायदा उठाना होगा। इस प्रकार की अवेयरनेस और इन्फर्मेशन (ए.आई.) से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में हम सिकलसेल का सफाया कर सकते हैं। इस दौर में आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा का समन्वित चिकित्सा दृष्टिकोण अपनाकर ही हम मरीज को बेहतर जीवन दे सकते हैं।
ये बात प्रख्यात चिकित्साविद् एवं भारत सरकार के आयुष मंत्रालय, सी सी आर एच के वैज्ञानिक सलाहकर मंडल के सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी ने रीवा में सिकलसेल के रोकथाम एवं संपूर्ण समाधान के परिप्रेक्ष्य में आयोजित जनजागरुकता कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में कही। किरण सेवा संस्थान, रीवा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कैरियर स्क्रीनिंग एवं विवाह पूर्व सिकलसेल जाँच पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से ही हम आने वाली पीढ़ियों को इस बीमारी से सुरक्षित रख सकेंगे। आयुष मंत्रालय के माध्यम से होम्योपैथी अनुसंधान को नई दिशा मिली है और इस पद्धति के जरिए सिकल सेल एवं एनीमिया के मरीजों में लक्षण नियंत्रण, जीवन गुणवत्ता में सुधार, दर्द में कमी तथा बार-बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता में कमी देखी गई है।

जन आंदोलन है सिकल सेल उन्मूलन
डॉ. द्विवेदी ने भारत सरकार के वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय जनआंदोलन है, जिसमें समाज के हर वर्ग की सहभागिता अनिवार्य है। जब तक समाज स्वयं आगे नहीं आएगा, तब तक कोई भी अभियान पूर्ण सफलता नहीं पा सकता। हमें इसे व्यक्तिगत के साथ, संपूर्ण समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी लेनी होगी। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सिकल सेल मरीजों को पहचान पत्र (आइडेंटिटी कार्ड) एवं आर्थिक सहायता प्रदान करना एक महत्वपूर्ण मानवीय एवं दूरदर्शी कदम है, जिससे रोगियों के उपचार में निरंतरता बनी रहती है। अगर किसी व्यक्ति को बार-बार दर्द, थकान, खून की कमी, संक्रमण की प्रवृत्ति आदि समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो उसे तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में सिकलसेल की जाँच कराकर उपचार शुरू कर देना चाहिए। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ. बीनू कुशवाह तथा किरण सेवा संस्थान के अध्यक्ष अजय मिश्रा ने भी संबोधित किया।


