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पश्चिमी जीवनशैली और वेस्टर्न टॉयलेट दोनों ही कब्ज का कारण
वर्ल्डकॉन 2026 के तीसरे दिन विशेषज्ञों ने बताया, लाइफस्टाइल सुधार से रोकी जा सकती हैं पाइल्स जैसी बीमारियां
इंदौर। पाइल्स अब सिर्फ उम्र से जुड़ी बीमारी नहीं रही, बल्कि यह तेजी से लाइफस्टाइल डिसीस के रूप में उभर रही है। लंबे समय तक शौचालय में बैठना, अधिक जोर लगाना, अनियमित दिनचर्या, तनाव और गलत खान-पान और वेस्टर्न टॉयलेट का अत्यधिक उपयोग इसकी बड़ी वजह बन रहा है इस वजह से इससे एनल केनाल की नसें फूल जाती हैं। डॉक्टरों के अनुसार सामान्य स्थिति में किसी व्यक्ति को तीन से चार मिनट से ज्यादा समय टॉयलेट में नहीं लगाना चाहिए। यह जानकारी दिल्ली से डॉ.नीरज गोयल ने इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कोलोप्रॉक्टोलॉजी द्वारा आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस वर्ल्डकॉन 2026 के तीसरे दिन दी।
मानसिक तनाव इस समस्या को बढ़ाते हैं
डॉ.गोयल ने कहा प्राकृतिक उपायों में फाइबर युक्त फल जैसे चीकू, पपीता, आड़ू, खुबानी, आम और जामुन बेहद फायदेमंद माने जाते हैं, क्योंकि ये आंतों की मूवमेंट को बेहतर बनाकर कब्ज को दूर करने में मदद करते हैं।अत्यधिक ऑयली फूड, स्मोकिंग, नींद की कमी और मानसिक तनाव इस समस्या को और बढ़ाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह कोई जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन लंबे समय तक ब्लीडिंग होने पर हीमोग्लोबिन कम होकर एनीमिया जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। पहले के मुकाबले अब बेहतर डायग्नोस्टिक और ट्रीटमेंट सुविधाओं के कारण मरीजों की संख्या रिपोर्ट हो रही है, जबकि यह समस्या पहले भी उतनी ही सामान्य थी। यह केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पाई जाने वाली एक सार्वभौमिक समस्या है, जिसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतें हैं। मुंबई से आए डॉ राय पाटनकर ने बताया कि बॉयोलॉजिकल क्लॉक के अनुसार सुबह फ्रेश होना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हो रहा, तो यह खराब जीवनशैली का संकेत है। अब पाइल्स का इलाज लेजर तकनीक से संभव है, जिसमें दर्द कम होता है और रिकवरी तेजी से होती है। मरीज अगले दिन से सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है।
युवाओं में बढ़ रही समस्या
ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ ईशान चौरसिया ने कहा कि फास्ट फूड और तेज रफ्तार जिंदगी पाइल्स के मामलों को बढ़ा रही है। डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं बढ़ने के साथ पाइल्स, फिशर और फिस्टुला के केस भी तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगभग हर घर में एक सदस्य इस समस्या से जूझ रहा है। मल्टीपल डिलीवरी के कारण महिलाओं में पेल्विक फ्लोर मसल्स कमजोर हो जाती हैं, जिससे उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ मयंक गुप्ता ने बताया कि आधुनिक तकनीकों के आने से पाइल्स का इलाज अब आसान और सुरक्षित हो गया है। मरीज को कम दर्द के साथ बेहतर परिणाम मिल रहे हैं, जिससे सर्जरी का डर भी कम हुआ है। इस मौके पर ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ महक भंडारी, डॉ सुदेश शारदा, डॉ अक्षय शर्मा, डॉ रोहन जैन, डॉ देवेंद्र चौहान और डॉ अचल अग्रवाल भी मौजूद थे।
हेल्दी बोवेल हैबिट्स के टिप्स
- पर्याप्त पानी पिएं। पानी मल को नरम रखने में मदद करता है, जिससे पेट आसानी से साफ होता है।
- फाइबर युक्त आहार लें। फाइबर कब्ज से बचाता है। साबुत अनाज, दालें, फल और हरी सब्जियां भोजन में शामिल करें।
- हर दिन एक ही समय पर शौचालय जाने का प्रयास करें, जैसे नाश्ते के 30-45 मिनट बाद।
- जोर न लगाएं और शौचालय में 10 मिनट से अधिक समय न बिताएं। अगर मल त्याग न हो, तो बाद में कोशिश करें।
- शौचालय में बैठते समय घुटनों को कूल्हों से ऊपर रखने के लिए 10 इंच का स्टूल (पायदान) का उपयोग करें।
- योग, पैदल चलना या व्यायाम करने से आंतें सक्रिय रहती हैं।
- कैफीन और प्रोसेस्ड फूड कम करें। कॉफी, सोडा और मैदा युक्त भोजन मल को सख्त कर सकते हैं।
- कम से कम 7 घंटे की नींद लें।


