- स्मार्ट सिटी प्लानिंग में जंगलों, कृषि भूमि और आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) को बचाना अनिवार्य: प्रसिद्ध वास्तुकार हफीज कॉन्ट्रैक्टर
- Ganesh Utsav 2026: Take Nath Inspiration from Shraddha Kapoor, Urmila Matondkar, Ankita Lokhande, Madhurima Tuli and Shriya Pilgaonkar
- Disha Patani, Sara Ali Khan to Alia Bhatt: Bollywood Divas Display Ways to Ace Traditional Fashion this Ganesh Chaturthi
- Pratibha Ranta Expresses Gratitude as The Revolutionaries Soars, Opens Up About Playing Pratibha Lahiri: There is so much quiet strength in the way women hold their lives together
- इंदौर में 'इंदौर टेक समिट 2026' का सफल आयोजन
स्वस्थ युवा-समृद्ध राष्ट्र-विश्व कल्याण का संदेश देकर डॉ. ए.के. द्विवेदी ने किया युवाओं का आह्वान
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर एसजीएसआईटीएस, इंदौर में हुआ प्रेरक व्याखायान
होम्योपैथी रिसर्च सेंटर और डिस्पेंसरी शुरू करने को लेकर की चर्चा
इंदौर, अगस्त | श्री गोविन्द राम सक्सेरिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एसजीएसआईटीएस) में अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर मंगलवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. डॉ. ए.के. द्विवेदी, हेड, डिपार्टमेंट ऑफ़ फिजियोलॉजी एवं बायोकेमिस्ट्री, एसकेआरपी गुजराती होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के अंतर्गत शिक्षा स्वास्थ्य न्यास के प्रांत संयोजक थे। उन्होंने भावी इंजीनियरिंग छात्रों को “स्वस्थ युवा–समृद्ध राष्ट्र–विश्व कल्याण” का प्रेरक संदेश दिया।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान में सोशल मीडिया पर केवल रील्स बनाना ही जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए,बल्कि हमें भारतीय ज्ञान परंपरा को समझना चाहिए। हमारे पूर्वजों ने जो तर्कसंगत, वैज्ञानिक और गहन अनुसंधान किए हैं, उन्हें आत्मसात कर अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र कल्याण में करना चाहिए। क्योंकि युवा भारत के भविष्य के निर्माता हैं और उनकी ऊर्जा, उत्साह व नवाचार की क्षमता ही आने वाले वर्षों में देश की प्रगति की दिशा तय करेगी। लेकिन तकनीकी और आर्थिक विकास तभी सार्थक है, जब हम स्वयं, अपने परिवार और समाज को शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक रूप से स्वस्थ रखें।
डॉ. द्विवेदी ने युवाओं को अपने जीवन में तीन संतुलित स्तंभ अपनाने का आह्वान किया—
- स्वयं का स्वास्थ्य – नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नशामुक्त जीवनशैली।
- परिवार का स्वास्थ्य व सहयोग – परिवार के सदस्यों का सम्मान, उनके स्वास्थ्य का ध्यान और पारिवारिक सुख-संतोष को प्राथमिकता देना।
- समाज एवं राष्ट्र का कल्याण – इंजीनियरिंग ज्ञान का उपयोग सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और समाज उत्थान में करना।
डॉ. द्विवेदी ने होम्योपैथी को भी स्वास्थ्य संरक्षण का एक सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि यह एक वैज्ञानिक, सरल और दीर्घकालिक लाभ देने वाली चिकित्सा पद्धति है, जो शरीर की प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर अनेक रोगों को जड़ से समाप्त करने में सहायक है। होम्योपैथी चिकित्सक और मां में अद्भुत समानता है। जैसे मां ममता से बच्चे का दुःख-दर्द दूर करती है, वैसे ही होम्योपैथी की औषधियां भी सुरक्षित और सहज तरीके से रोगी को राहत देती हैं।
कार्यक्रम में डॉ. द्विवेदी ने शोध और रिपोर्ट आधारित उदाहरणों से बताया कि होम्योपैथी ने एप्लास्टिक एनीमिया और हेमाटोहाइड्रोसिस (खूनी पसीना) जैसे गंभीर रोगों के मरीजों को राहत देने में सफलता पाई है। साथ ही बताया कि वार्ट्स, पाइल्स, पथरी, फिस्टुला और मधुमेह जैसी सामान्य व पुरानी बीमारियों में भी होम्योपैथी किस तरह प्रभावी है। डॉ. द्विवेदी ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि मधुमेह के रोगियों को डिस्टिल्ड वाटर में होम्योपैथी दवाएं देने से उनकी शुगर नियंत्रित रहती है, और कई ऐसे मरीज जिन्हें इंसुलिन के बाद भी लाभ नहीं मिल रहा था, उन्हें होम्योपैथी से बेहतर परिणाम मिले हैं।
आखिरी में डॉ. द्विवेदी ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित आहार-विहार को अपनाने, कम शक्कर और कम तेल वाले सुपाच्य भोजन का सेवन करने तथा नियमित योग और प्राणायाम करने की शपथ छात्रों से दिलवाई। उन्होंने कहा एक स्वस्थ, शिक्षित और नैतिक युवा ही सशक्त भारत का निर्माण कर सकता है, और सशक्त भारत ही विश्व कल्याण में सर्वोच्च योगदान दे सकता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. द्विवेदी का स्वागत पौधा भेंटकर डॉ. सचिन बलसारा ने किया। मोमेंटो प्रो. सारिका तिवारी ने भेंट किया। कार्यक्रम कॉर्डिनेटर डॉ. निधि ओसवाल ने थीं।
होम्योपैथी रिसर्च सेंटर और डिस्पेंसरी शुरू करने को लेकर की चर्चा
संस्थान के निदेशक प्रोफेसर श्री नितेश पुरोहित जी ने डॉ. द्विवेदी जी से संस्थान में होम्योपैथी रिसर्च सेंटर और डिस्पेंसरी प्रारम्भ करने का आग्रह किया। तत्पशाच डॉ. द्विवेदी ने होम्योपैथी रिसर्च सेंटर और डिस्पेंसरी शुरू करने को लेकर संस्थान के हेल्थ केयर विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रतिनिधि से चर्चा की। इसको लेकर परिसर में स्थान भी देखा गया और जल्द ही इस संबंध में निर्णय कर होम्योपैथी रिसर्च सेंटर व डिस्पेंसरी शुरू करने की बात कही।


