- स्टारडम के बजाय किरदार-प्रधान सिनेमा क्यों चुन रही हैं अभिनेत्रियाँ — इंडस्ट्री के नए नियमों पर शीना चोहान
- Beyond Stardom: Why Sheena Chohan Is Choosing Challenging Characters Over Conventional Roles
- One ride 2026: final call to ride for the snow leopard
- वन राईड 2026: स्नो लेपर्ड के लिए राईड करने का अंतिम मौका
- AU Small Finance Bank appoints Anil Agarwal as Senior Executive Group Head – Commercial & Institutional Banking and Amol Padhye as Chief Risk Officer
इंदौर में 1-2 अगस्त से शुरू होगी गैस्ट्रो अपडेट 2.0 कॉन्फ्रेंस, देशभर के विशेषज्ञ गैस्ट्रो और लिवर रोगों पर करेंगे मंथन
इंदौर। अनियमित खानपान, फास्ट फूड की बढ़ती आदत, तनाव, मोटापा, धूम्रपान और शराब के बढ़ते सेवन के कारण देश में पाचन तंत्र और लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। एसिडिटी, गैस, फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, पीलिया, अल्सर, पैंक्रियाटाइटिस, इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज और कोलन कैंसर जैसी समस्याएं अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि युवाओं और कामकाजी वर्ग में भी तेजी से सामने आ रही हैं। समय पर जांच, सही उपचार और चिकित्सकों तक नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से 1 एवं 2 अगस्त को मेदांता हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग द्वारा गट क्लब इंदौर के सहयोग एवं इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (आईएसजी), मध्यप्रदेश चैप्टर की वार्षिक बैठक के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर की गैस्ट्रो अपडेट 2.0 कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में देशभर के वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट, एंडोस्कोपिस्ट और फिजिशियन आधुनिक उपचार पद्धतियों, नई तकनीकों और जटिल मामलों पर अपने अनुभव साझा करेंगे।
डॉ. हरि प्रसाद यादव, ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन, गैस्ट्रो अपडेट 2.0 कॉन्फ्रेंस ने कहा कि अधिकांश लोग पेट और लिवर से जुड़ी समस्याओं को सामान्य समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करते रहते हैं, जबकि लगातार एसिडिटी, अपच, पेट दर्द, निगलने में परेशानी, वजन का अचानक कम होना, बार बार पीलिया होना, मल त्याग की आदतों में बदलाव या मल में रक्त आना जैसे लक्षण कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्षेत्र में एंडोस्कोपी, ईयूएस, ईआरसीपी, लिवर डिजीज मैनेजमेंट और मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाओं ने उपचार को अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी बनाया है। आधुनिक लेजर तकनीक के माध्यम से पित्त की नली में फंसी जटिल पथरी का भी सफल एवं सुरक्षित उपचार संभव हो रहा है, जिससे कई मरीजों को बड़ी सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती। गैस्ट्रो अपडेट 2.0 कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य इन नई तकनीकों और वैश्विक उपचार मानकों को चिकित्सकों तक पहुंचाना है, ताकि मरीजों को समय पर सही निदान और बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
डॉ. अरुण एस. भदौरिया, ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी, गैस्ट्रो अपडेट 2.0 कॉन्फ्रेंस ने बताया कि दो दिवसीय गैस्ट्रो अपडेट 2.0 कॉन्फ्रेंस में जीआई एंडोस्कोपी का वर्तमान और भविष्य, कठिन सीबीडी स्टोन के उपचार में नई तकनीकें, पीलिया के विभिन्न कारण, फैटी लिवर और स्वस्थ लिवर के लिए नवीनतम चिकित्सा मानक, क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी के उपचार, मध्य भारत में लिवर ट्रांसप्लांट की वर्तमान स्थिति, गैस और अपच की समस्या, अल्सरेटिव कोलाइटिस, एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस, कोलैंजियोस्कोपी तथा एडवांस एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड जैसी अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर वैज्ञानिक व्याख्यान, केस आधारित चर्चा और विशेषज्ञ पैनल आयोजित किए जाएंगे। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले विशेषज्ञ नवीनतम गाइडलाइंस और अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे प्रदेश के चिकित्सकों को विश्वस्तरीय चिकित्सा ज्ञान का लाभ मिलेगा।
डॉ. अतुल शेंडे, प्रेसिडेंट, गट क्लब इंदौर ने कहा कि किसी भी बीमारी के उपचार में जागरूकता की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी आधुनिक चिकित्सा की। यदि लोग संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें, वजन नियंत्रित रखें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखें तथा पेट और लिवर से जुड़े शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि गैस्ट्रो अपडेट 2.0 कॉन्फ्रेंस केवल विशेषज्ञों के बीच वैज्ञानिक चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बेहतर चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से समाज में पाचन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आम लोगों तक सही स्वास्थ्य संदेश पहुंचाना भी है।
डॉ. सोहिनी सरकार, सेक्रेटरी, गट क्लब इंदौर ने बताया कि गैस्ट्रो अपडेट 2.0 कॉन्फ्रेंस में देशभर से बड़ी संख्या में गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट, एंडोस्कोपिस्ट, फिजिशियन और युवा चिकित्सक भाग लेंगे। दो दिनों तक चलने वाली इस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों के बीच ज्ञान और अनुभवों का आदान प्रदान होगा, जिससे नई उपचार पद्धतियों को तेजी से अपनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि उसे समय रहते पहचानना और रोकना भी है। इसलिए लोगों को पेट या लिवर से जुड़ी किसी भी समस्या को सामान्य मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। यही जागरूकता भविष्य में गंभीर बीमारियों और जटिल उपचार की आवश्यकता को काफी हद तक कम कर सकती है।
मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संजय गीद ने कहा कि मेदांता का उद्देश्य केवल उत्कृष्ट उपचार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और वैज्ञानिक शोध को भी निरंतर बढ़ावा देना है। गैस्ट्रो अपडेट 2.0 जैसे राष्ट्रीय स्तर के एकेडमिक आयोजन विशेषज्ञों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को गति देते हैं, जिससे नवीनतम उपचार पद्धतियों का लाभ अंततः मरीजों तक पहुंचता है। ऐसे आयोजन प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


