- स्मार्ट सिटी प्लानिंग में जंगलों, कृषि भूमि और आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) को बचाना अनिवार्य: प्रसिद्ध वास्तुकार हफीज कॉन्ट्रैक्टर
- Ganesh Utsav 2026: Take Nath Inspiration from Shraddha Kapoor, Urmila Matondkar, Ankita Lokhande, Madhurima Tuli and Shriya Pilgaonkar
- Disha Patani, Sara Ali Khan to Alia Bhatt: Bollywood Divas Display Ways to Ace Traditional Fashion this Ganesh Chaturthi
- Pratibha Ranta Expresses Gratitude as The Revolutionaries Soars, Opens Up About Playing Pratibha Lahiri: There is so much quiet strength in the way women hold their lives together
- इंदौर में 'इंदौर टेक समिट 2026' का सफल आयोजन
स्मार्ट सिटी प्लानिंग में जंगलों, कृषि भूमि और आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) को बचाना अनिवार्य: प्रसिद्ध वास्तुकार हफीज कॉन्ट्रैक्टर
Pune, September 13, 2026:एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU), पुणे में ‘हफीज कॉन्ट्रैक्टर स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर’ के उद्घाटन सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध वास्तुकार हफीज कॉन्ट्रैक्टर ने शहर नियोजन में एक नए दृष्टिकोण को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बढ़ती शहरी आबादी को बसाने के लिए जंगलों, कृषि भूमि और आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) की रक्षा करते हुए उच्च घनत्व (High-density) और त्रिआयामी (3D) निर्माण पद्धतियों पर विचार करना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि के रूप में फाइन ज्वैलर पवन आनंद और वास्तुकार पुष्कर कानविंदे उपस्थित रहे। इसके अलावा सम्मेलन में एमआईटी-डब्ल्यूपीयू का नेतृत्व, प्राध्यापक, छात्र और वास्तुकला, डिजाइन, उद्योग व शिक्षा जगत की प्रमुख हस्तियां एकत्र हुईं। इस दौरान तेजी से बदलते शहरों, स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) की चुनौतियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों के संदर्भ में वास्तुकला शिक्षा में आने वाले बदलावों पर गहन चर्चा की गई।
अपने संबोधन में वास्तुकार हफीज कॉन्ट्रैक्टर ने कहा कि मेरे नाम से जुड़े आर्किटेक्चर कॉलेज के साथ जुड़ना एक बड़ी जिम्मेदारी है। छात्रों को वास्तुकला के मूल सिद्धांतों को सीखना चाहिए और यह समझना चाहिए कि वे जो भी करें, उसका एक उद्देश्य होना चाहिए। जिस तरह से हमारे शहर बढ़ रहे हैं, हमें निर्माण के नए तरीकों और शहरों के डिजाइन पर फिर से विचार करना होगा।
उन्होंने आगे कहा कि शहरों का विस्तार करते हुए कृषि भूमि और जंगलों को नष्ट करने का सिलसिला अब आगे नहीं चल सकता। यदि हम अपने पर्यावरण को नष्ट करेंगे तो हमारा अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। हमें निर्माण के नए तरीकों पर विचार करना होगा कि कैसे हम लागत और शहरों में आ रहे लाखों लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हमारा शहर नियोजन केवल दो आयामी (2D) नहीं रह सकता; हमें शहरों के बारे में तीन आयामों (3D) में सोचना होगा। हमें भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में रखते हुए इमारतों को डिजाइन करना होगा। सीमेंट और स्टील बुनियादी सामग्री हैं, लेकिन उनमें भी सुधार की जरूरत है ताकि हम मजबूत निर्माण कर सकें। हम अपने शहरों को कैसे डिजाइन करते हैं, यह हमारे भविष्य को आकार देगा और इस संस्थान को नए विचारों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि भविष्य युवाओं का ही है।
एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा कि हफीज कॉन्ट्रैक्टर का इस संस्थान से जुड़ना हमारे लिए सम्मान की बात है, लेकिन इसके साथ ही संस्थान को समय के अनुकूल बनाए रखने की एक बड़ी जिम्मेदारी भी हम पर आती है। वास्तुकला इस बात को प्रभावित करती है कि लोग कैसे रहते हैं, काम करते हैं और शहर का अनुभव करते हैं। तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण सीखने और काम करने का तरीका बदल रहा है, ऐसे में उद्योग और शिक्षा जगत को मिलकर छात्रों को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करना होगा।
सृजनात्मकता और अंतर-विषय (इंटरडिसिप्लिनरी) शिक्षा पर विचार साझा करते हुए फाइन ज्वैलर पवन आनंद ने कहा कि वास्तुकला रचनात्मकता का एक बेहतरीन माध्यम है, लेकिन यह अनुभव और किसी स्थान से आपके जुड़ाव के बारे में भी है। छात्रों को खुद को केवल अपनी डिग्री तक सीमित नहीं रखना चाहिए। आर्किटेक्चर से ज्वेलरी डिजाइन तक के मेरे सफर ने मुझे सिखाया कि रचनात्मकता किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होती। अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा और रुचि को पहचानें और अपनी रचनात्मकता को नई दिशा देने से न डरें।
सतत सीखने के महत्व पर जोर देते हुए वास्तुकार पुष्कर कानविंदे ने कहा कि वास्तुकला ज्ञान का एक व्यापक क्षेत्र है। छात्रों को अनुभवों, प्रयोगों और लोगों से मिलकर सीखने की पहल खुद करनी होगी। 5 साल की पढ़ाई के बाद सीखना बंद नहीं होता, आपको जीवनभर सीखते रहना होगा। एआई (AI) जैसी परिवर्तनकारी तकनीक के दौर में भी आपको इससे आगे बढ़कर उस रचनात्मकता को निखारना होगा जो आपको एक बेहतर वास्तुकार बनाती है।
सम्मेलन के दौरान वास्तुकला शिक्षा के भविष्य को आकार देने वाले दो प्रमुख विषयों पर गोलमेज (राउंड-टेबल) चर्चाएं आयोजित की गईं। पहले सत्र ‘सस्टेनेबिलिटी (SDGs) और वास्तुकला शिक्षा का भविष्य’ में वास्तुकला की पढ़ाई में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को शामिल करने और बदलते पर्यावरण के अनुकूल छात्रों को तैयार करने पर बल दिया गया। दूसरे सत्र ‘प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप और बी.आर्च. छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना’ में वास्तुकला में तकनीक की बढ़ती भूमिका और छात्रों को अकादमिक शिक्षा से पेशेवर क्षेत्र में सहजता से स्थानांतरित करने पर चर्चा हुई। इन दोनों सत्रों में छात्रों के साथ इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर आयोजित किए गए, जिससे उन्हें विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने का अवसर मिला।


