- BHIVE Unveils Its First-Ever Brand Film with Milind Soman, Turning Its Campus Workplace Vision into a Movement
- नेशनल अवॉर्ड विनर अंजलि पाटिल की ‘सेल्वी’ ने बुसान प्रीमियर से पहले जारी किया नया पोस्टर
- पूजा बत्रा, अदिति गोवित्रिकर और दीपक तिजोरी ने योगासन चैंपियनशिप में जमाया रंग, फिटनेस को लेकर दिया खास संदेश
- A Soulful Farewell to Bappa: Nirvaan Birla Presents His Rendition of ‘Jai Ganesha Deva’
- Krishna das joins amjad ali khan’s chants for unity for a powerful rendition of om mani padme hum
यूनिक हॉस्पिटल में जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के लिए उन्नत मिसो रोबॉटिक प्रणाली
इंदौर, 09 अप्रैल 2026: यूनिक हॉस्पिटल ने आर्थोपेडिक जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट के लिए अत्याधुनिक मिसो (MISSO) रोबॉटिक प्रणाली की शुरुआत की है। इसी वर्ष 1 जनवरी से शुरू हुई यह एआई – आधारित उन्नत तकनीक, अब तक 20 मरीजों में घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी को अधिक सटीक और प्रभावी बना चुकी है, जिससे शत – प्रतिशत मरीजों को बेहतर परिणाम मिले हैं।
यूनिक हॉस्पिटल के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ. कृष्णकांत नीमा ने बताया कि मिसो रोबोट तकनीक सर्जरी के परिणामों को बेहतर बनाने के साथ-साथ मरीजों के उपचार को सरल बना रही है। इस रोबोटिक प्रणाली से की गई सर्जरी में अत्यधिक सटीकता हासिल होती है, जिससे हड्डियों की कम से कम कटिंग होती है और आसपास के टिश्यूज़ को कम नुकसान पहुँचता है। यही कारण है कि मरीजों की रिकवरी तेज़ी से होती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तकनीक से दर्द में कमी आती है और जटिलताओं का जोखिम काफी हद तक घट जाता है।
मिसो रोबोटिक प्रणाली, सर्जन्स को पूर्व-संचालन योजना, रियल-टाइम प्रतिक्रिया और सटीक जॉइंट प्लेसमेंट में मदद करती है। इस अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके पार्शियल या टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी में रोगियों को कम से कम दर्द का अनुभव होता है, और उनकी और तेजी से होती है।
यूनिक हॉस्पिटल के डायरेक्टर, रोबॉटिक जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जन डॉ. प्रमोद पी. नीमा ने कहा – “जैसे – जैसे हमारे आस – पास जनसंख्या बढ़ती जा रही है, उम्र से जुड़ी बीमारियों, खास तौर पर जोड़ों के स्वास्थ्य और गतिशीलता को प्रभावित करने वाली बीमारियां बढ़ रही हैं। जोड़ों के घिसने, खराब होने के सबसे आम कारणों में से एक ऑस्टियोआर्थराइटिस है, जो अक्सर जॉइन्ट रिप्लेसमेंट सर्जरी की जरूरत पैदा करता है। हमारे देश की कुल आबादी का लगभग 10% वरिष्ठ नागरिक होने के कारण, हमारे पास सर्जरी का एक बड़ा बोझ है। हर वर्ष होने वाले जॉइन्ट रिप्लेसमेंट जनसंख्या के हिसाब से बहुत कम है। इस पूरी प्रक्रिया में मदद करने के लिए, और उन्हें अधिक परिष्कृत बनाने के लिए, हमें रोबोट की आवश्यकता है।
रोबोट जॉइन्ट रिप्लेसमेंट सर्जन को वास्तविक समय में सहायता देता है, जिससे ऑपरेशन के दौरान सटीक समायोजन और इम्प्लांट प्लेसमेंट संभव हो पाता है। यह अत्याधुनिक प्रणाली थ्री-डी सीटी स्कैन के आधार पर मरीज की शारीरिक संरचना को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत सर्जिकल योजना तैयार करती है। इसके परिणामस्वरूप सर्जरी के बाद की जटिलताओं, जैसे इम्प्लांट का ढीला होना या जल्दी घिसना, काफी हद तक कम हो जाते हैं। मरीजों के दृष्टिकोण से सबसे बड़ा लाभ यह है कि छोटे चीरे और खून की कम हानि के कारण उनकी रिकवरी तेज़ होती है, और उन्हें अस्पताल में केवल 3–4 दिन ही रुकना पड़ता है।
बढ़ती आवश्यकता और दुनिया भर में सर्जरी में रोबोटिक सिस्टम के बढ़ते उपयोग के लिए, एक भारतीय अंतर्राष्ट्रीय कंपनी मेरिल ने पिछले वर्ष जून में अपना खुद का अत्याधुनिक ऑर्थोपेडिक रोबोट, MISSO रोबोटिक सिस्टम लॉन्च किया। यह तकनीक व्यक्तिगत प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग प्रदान करके और सटीक हड्डी के कट को निष्पादित करके संयुक्त प्रतिस्थापन प्रक्रियाओं में सर्जन की सहायता करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे सर्जरी के परिणाम सुसंगत और बेहतर होते हैं।


