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कृषक पशुपालन और उद्यानिकी से अपनी आय दुगुनी कर सकते हैंः प्रभांशु कमल
इंदौर. कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री प्रभांशु कमल की अध्यक्षता में आज रेसीडेंसी सभाकक्ष में संभाग स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें इंदौर संभाग के सभी कलेक्टर्स और सभी जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
इस अवसर पर श्री प्रभांशु कमल ने पशुपालन, कुक्कुट पालन, उद्यानिकी और मत्स्य विभाग की समीक्षा की। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार किसानों की आय दुगुनी करना चाहते हैं। प्रदेश के कृषक पशुपालन, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी के जरिये अपनी आय दुगुनी कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, दृढ़ इच्छाशक्ति,पक्के इरादे से किसान अपनी किस्मत बदल सकते हैं और अपनी गरीबी मिटा सकते हैं। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी और पशुपालन के क्षेत्र में रोजगार की व्यापक संभावनाएँ हैं। किसान अपने व्यवसाय के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकते हैं। बैठक को संभागायुक्त श्री आकाश त्रिपाठी ने भी सम्बोधित किया।
उन्होंने उद्यानिकी विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि इंदौर संभाग में फल, सब्जी, मसाले और औषधीय खेती की व्यापक संभावनाएँ हैं। उद्यानिकी विभाग द्वारा इस क्षेत्र में क्षेत्र विस्तार के लिये न केवल अनुदान बल्कि तकनीक और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराता है।
उन्होंने कहा कि उद्यानिकी विभाग के अधिकारी शासकीय नर्सरी का विस्तार और रखरखाव करें। नर्सरी के संधारण के लिये स्वसहायता समूह और मनरेगा योजना का भी सहयोग ले सकते हैं। प्रदेश के साथ-साथ इंदौर संभाग में भी वन विस्तार की बहुत अधिक आवश्यकता है। नमामि देवि नर्मदे योजना के तहत राज्य शासन नर्मदा नदी के किनारे इस पार और उस पार दो-दो किमी. वृक्षारोपण करना चाहता है।
उद्यान विभाग की जिम्मेदारी यह भी है कि वह सस्ती दर पर वृक्षारोपण के लिये आम आदमी और शासकीय एजेंसियों को पौधे उपलब्ध करायें। उद्यान विभाग द्वारा प्रदेश में बीपीएल परिवारों को सब्जी के मुफ्त में बीज वितरित किये जाते हैं। किसानों को संरक्षित खेती के लिये पोलीहाउस, शेडनेट और प्लास्टिक मल्चिंग के लिये अनुदान प्रदान किया जायेगा।
इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव पशुपालन श्री मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि पशुपालन और डेयरी उद्योग से किसान अपनी गरीबी दूर कर सकते हैं। उन्हें उन्नत नस्ल के पशुओं का पालन करना होगा और पशुपालन से पहले चारे और पानी की व्यवस्था करना होगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पशुओं के इलाज में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा पशुओं के इलाज की त्वरित सेवा के लिये पशु संजीवनी योजना शुरू की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पशुओं की टैगिंग की जा रही है। हर जिले में प्राथमिकता के आधार पर गौशाला खोली जा रही है। गौशाला का रखरखाव ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जायेगा। इसके लिये आवश्यक बजट राज्य शासन द्वारा दे दिया गया है।
इस अवसर प्रमुख सचिव मत्स्य पालन श्री अश्विनी राय ने बताया कि प्रदेश में मछली पालन की व्यापक संभावनाएँ हैं। इससे किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। प्रदेश में ऐसे कई मत्स्य कृषक हैं, जो एक लाख रूपये से अधिक प्रतिमाह कमाते हैं। मत्स्य विभाग की वेबसाइट पर उनकी सक्सेस स्टोरी भी दर्ज है।
बैठक में भी कई मत्स्य कृषकों ने अपनी सफलता की कहानी सुनायी। धार जिले के सुंद्रैल गाँव में एक किसान द्वारा व्यापक पैमाने पर मत्स्य बीज का उत्पादन किया जा रहा है। उसका टर्न ओवर चार करोड़ रूपये सालाना है और उसके पास 40 नौकर भी हैं। प्रदेश के सभी तालाबों में मछली पालन करके मत्स्य पालन चार गुना बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश में मत्स्य पालन के क्षेत्र में उन्नत तकनीक आ गयी है। मत्स्य विभाग द्वारा इस उन्नत तकनीक का व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस अवसर पर बैठक में बताया गया कि इंदौर संभाग में दुग्ध उत्पादन यानि श्वेत क्रांति की व्यापक संभावनाएँ हैं। उन्नत नस्ल के गाय-भैंस पाल कर किसान अपनी माली हालत सुधार सकते हैं। हर जिले में दुग्ध समितियों के गठन करने की जरूरत है। हर जिले में दुग्ध संघ द्वारा या निजी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर डेयरी उद्योग स्थापित करने की जरूरत है। डेयरी उद्योग के लिये कृत्रिम गर्भाधान, दुग्ध समितियों द्वारा दुग्ध संकलन, पशु आहार विक्रय जरूरी है।
इंदौर जिले में दुग्ध उत्पादन का काम बहुत अच्छा चल रहा है। इंदौर साँची डेयरी की क्षमता का विस्तार किया जायेगा। खरगोन जिले में 400 दुग्ध समितियाँ काम कर रहीं हैं। इसी प्रकार धार जिले में 535 दुग्ध समितियाँ कार्यरत हैं।
इंदौर जिले में डेढ़ लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन किसान जा रहा है। 2019-20 में 2 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। इंदौर जिले में स्थानीय स्तर पर लगभग 1 लाख 51 हजार लीटर दुग्ध विक्रय किया जा रहा है। इंदौर सहकारी दुग्ध संघ द्वारा 2 हजार लीटर प्रति पारी क्षमता वाला आइसक्रीम प्लांट की स्थापना की कार्यवाही की जा रही है। इस योजना में अनुमानित लागत साढ़े तीन करोड़ है।


