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शहर की पहचान थीं वीणा नागपाल
‘शब्द सुरों की वीणा’ का लोकार्पण, लेखन, परिकल्पना और दूरदृष्टि का त्रिवेणी संगम
-वीणा जी का लेखन, दिव्या जी की परिकल्पना और अशोक जी की दूरदृष्टि का सुफ़ल है शब्द सुरों की वीना
इंदौर। स्व. वीणा नागपाल के चिंतन, संवेदना और लेखनी को समर्पित लेख संकलन ‘शब्द सुरों की वीणा’ का लोकार्पण सोमवार को रवींद्र नाट्य गृह में एक गरिमामय समारोह में हुआ। पुस्तक का विमोचन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया। यह संकलन वीणा नागपाल के स्त्री विमर्श और सामाजिक विषयों पर लिखे गए लेखों को समेटे हुए है, जो उनकी लेखकीय दृष्टि और सामाजिक सरोकारों का सशक्त दस्तावेज है।
सिंधिया ने अपने उद्बोधन में कहा, “वीणा नागपाल केवल इंदौर की नागरिक नहीं थीं, वे एक संस्था थीं। उनका लेखन गहन, गंभीर और संवेदनशील था। ‘शब्द सुरों की वीणा’ न केवल एक संकलन है, बल्कि उनके विचारों और सरोकारों को चिरस्थाई करने का प्रयास भी है। मैं यहां मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य और इंदौर की लेखनी के सामने एक शिष्य के रूप में उपस्थित हूं। पुस्तक केवल लेखों का संग्रह नहीं, बल्कि वीणा जी के लेखन, डॉ. दिव्या गुप्ता की परिकल्पना और डॉ. अशोक कुमट की दूरदृष्टि का परिणाम है, जिसने इसे एक भावपूर्ण दस्तावेज बना दिया।
पत्रकारिता की मूर्धन्य हस्ती वीणा नागपाल
समारोह में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि वीणा नागपाल पत्रकारिता की मूर्धन्य हस्ती थीं। उनकी लेखनी में दिशा देने की ताकत थी और आज की पीढ़ी के लिए उनका लेखन प्रेरणास्रोत बना रहेगा। इस मौके पर डॉ. दिव्या गुप्ता ने अपनी मां को याद करते हुए भावुक शब्दों में कहा कि यह पुस्तक उनके विचारों की गूंज है, जिसे वे आज भी महसूस करती हैं। मंच पर पद्मभूषण सुमित्रा महाजन बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में सांसद शंकर लालवानी, डॉ. अशोक कुमट, यशभूषण जैन,सुनीता गुप्ता और पवन नागपाल सहित शहर के कई प्रबुद्धजन शामिल हुए।


