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एमआईटी-डब्लूपीयू, एनआईपीएम कर्नाटक और इंडस्ट्री लीडर्स ने कंपनियों की जरूरतों के हिसाब से पढ़ाई और एआई के लिए तैयार टैलेंट विकसित करने पर जोर दिया
आईबीएम, बायोकॉन, कैनोनिकल, क्राफ्ट हेन्ज इंडिया और जेएलएल जैसी बड़ी कंपनियों के इंडस्ट्री लीडर्स ने एनआईपीएम कर्नाटक और एमआईटी-डब्लूपीयू के साथ मिलकर एआई के लिए तैयार टैलेंट और भविष्य के कर्मचारियों की जरूरतों पर चर्चा की।
पुणे/बेंगलुरु: जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमेशन और तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी दुनिया भर में काम करने के तरीके बदल रही हैं, भविष्य के लिए तैयार टैलेंट तैयार करने और युवाओं को नौकरी के लायक बनाने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (एमआईटी-डब्लूपीयू), पुणे और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट (एनआईपीएम), कर्नाटक चैप्टर द्वारा आयोजित ‘इंडस्ट्री एकेडमिया कॉन्क्लेव 2026’ में इंडस्ट्री लीडर्स और शिक्षाविदों ने कॉलेजों और कंपनियों के बीच मजबूत साझेदारी की जरूरत पर जोर दिया।
बेंगलुरु में “ब्रिजिंग आइडियाज। बिल्डिंग फ्यूचर्स” थीम के तहत आयोजित इस सम्मेलन में सीनियर एचआर लीडर्स, प्रोफेसर्स, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स, मैन्युफैक्चरिंग प्रोफेशनल्स और इंडस्ट्री से जुड़े लोग एक साथ आए। इस दौरान काम के बदलते तरीकों, एआई से होने वाले बदलावों, कर्मचारियों की नई उम्मीदों और लगातार नई स्किल सीखते रहने की जरूरत पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में कई पैनल चर्चाएं और मुख्य सत्र हुए, जिनका मकसद छात्रों और प्रोफेशनल्स को बदलती जरूरतों के लिए तैयार करना था।
इस कार्यक्रम में इंडस्ट्री के कई बड़े दिग्गजों ने अपने विचार रखे, जिनमें श्री त्यागू वल्लियप्पा, वाइस चेयरमैन, सोना वल्लियप्पा ग्रुप, प्रो. प्रसाद डी. खांडेकर, चीफ एकेडमिक ऑफिसर, एमआईटी-डब्लूपीयू और श्री संजय मित्रा, चेयरमैन, एनआईपीएम कर्नाटक चैप्टर शामिल थे। साथ ही आईबीएम, बायोकॉन, कैनोनिकल, क्राफ्ट हेन्ज इंडिया, जेएलएल और अन्य बड़ी कंपनियों के सीनियर प्रोफेशनल्स ने भी इसमें हिस्सा लिया।
अपने मुख्य भाषण में, श्री त्यागू वल्लियप्पा ने बताया कि कंपनियों की जरूरतों से जुड़ी पढ़ाई के मॉडल छात्रों को नौकरी मिलने में कैसे मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को सिर्फ आज के ट्रेंड्स के पीछे नहीं चलना चाहिए, बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी और कर्मचारियों की जरूरतों का पहले से अंदाजा लगाकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा, “भविष्य उन्हीं संस्थानों का है जो कल की टेक्नोलॉजी को आज ही सिखा सकते हैं। शिक्षा या स्किलिंग में अब एक जैसा तरीका सबके लिए काम नहीं करेगा।”
चर्चा में यह भी सामने आया कि टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किसी हुनर की उपयोगिता का समय लगातार कम होता जा रहा है। इन क्षेत्रों में तेजी से हो रहे नए आविष्कारों के कारण नौकरी की भूमिकाएं और स्किल्स की जरूरतें बदलती रहती हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने कहा कि कंपनियां आज सिर्फ किताबी डिग्री नहीं देखतीं, बल्कि ऐसे युवाओं को ढूंढ रही हैं जिनके पास व्यावहारिक अनुभव, अलग-अलग क्षेत्रों की समझ, समस्याएं सुलझाने की क्षमता और बदलते माहौल के साथ खुद को ढालने की खूबी हो।
एनआईपीएम कर्नाटक चैप्टर के चेयरमैन श्री संजय मित्रा ने कहा कि एचआर प्रोफेशनल्स और शैक्षणिक संस्थानों के बीच करीबी तालमेल बेहद जरूरी है। इससे यह पक्का किया जा सकेगा कि कॉलेजों का सिलेबस कंपनियों की बदलती उम्मीदों और वर्कप्लेस की हकीकत के हिसाब से अपडेट रहे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रो. प्रसाद डी. खांडेकर ने कहा कि हर इंडस्ट्री में एआई के कारण आ रहे बदलावों के साथ कदम मिलाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों पर अपना सिलेबस और पढ़ाने के तरीके बदलने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा, “इंडस्ट्री की उम्मीदें पहले से कहीं तेजी से बदल रही हैं। यूनिवर्सिटीज आज छात्रों को सिर्फ मौजूदा नौकरियों के लिए नहीं, बल्कि उन भूमिकाओं के लिए तैयार कर रही हैं जो अगले तीन से चार सालों में काफी बदल सकती हैं। यह चुनौती तभी हल हो सकती है जब कॉलेज और कंपनियां लगातार मिलकर काम करें।”
उन्होंने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटीज को सिर्फ तकनीकी ज्ञान देने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि छात्रों को भविष्य के वर्कप्लेस के लिए तैयार करने के लिए सही सोच और नजरिए का विकास, बदलावों को अपनाने की क्षमता, अनुभव के जरिए सीखना और अलग-अलग विषयों को मिलाकर सोचने की क्षमता पर भी ध्यान देना होगा।
इस पूरी चर्चा का अंत एक सामूहिक अपील के साथ हुआ, जिसमें कंपनियों और कॉलेजों के बीच लंबे समय की साझेदारी, इनोवेशन को बढ़ावा देने वाले पढ़ाई के माहौल और मिलकर स्किल सिखाने की पहलों पर जोर दिया गया। इसका मकसद भारत को भविष्य की इकोनॉमी के लिए दुनिया में प्रतिस्पर्धी और एआई के लिए तैयार टैलेंट बनाने में मदद करना है।


