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प्री कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स से हुई एनएसआईकॉन 2025 की शुरुआत
न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन्स और न्यूरो नर्सेज़ के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित
इंदौर, 10 दिसंबर 2025| इंदौर में आयोजित 73वें एनुअल कॉन्फ्रेंस एनएसआईकॉन 2025 की शुरुआत आज ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर, विजय नगर, इंदौर में प्री कॉन्फ्रेंस सत्रों के साथ हुई। इस कॉन्फ्रेंस का आरंभ दो महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रमों से हुआ। पहला कार्यक्रम न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन्स के लिए था, जिसे वरिष्ठ विशेषज्ञों की प्रत्यक्ष निगरानी में आयोजित किया गया। दूसरा कार्यक्रम न्यूरो नर्सेज़ के लिए था, जिसे उनके क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञों ने संचालित किया। यह विस्तार बताता है कि एनएसआईकॉन 2025 केवल वैज्ञानिक विचार विमर्श का मंच नहीं है बल्कि यह वास्तविक प्रशिक्षण और कौशल विकास का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र भी है।
न्यूरो नर्सेज़ और सहयोगियों का प्रशिक्षण
इंदौर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया और उनकी टीम का विशेष सहयोग रहा। डॉ. घनघोरिया ने स्वयं सुझाव दिया कि इस क्षेत्र का प्रशिक्षण इंदौर की नर्सेज़ को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराया जाए ताकि शहर में मौजूद विशेषज्ञता और संसाधनों का सीधा लाभ उन्हें मिल सके। इस ऐतिहासिक अवसर पर एमवायएच और एसएसएच के नर्सिंग अधिकारियों ने भी इस विशिष्ट न्यूरो नर्स वर्कशॉप के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं दूसरे सत्र के लिए इंदौर सौभाग्यशाली रहा क्योंकि यहाँ आईआरसीएडी जैसा अत्याधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण केंद्र वर्षों से संचालित है। इसी आईआरसीएडी में दूसरा प्रमुख प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। एमजीएम मेडिकल कॉलेज की कार्यशाला का शुभारंभ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में डॉ. अरविंद घनघोरिया ने किया। यहां पर डॉक्टर ओमप्रकाश लेखरा के मार्गदर्शन में डॉक्टर सोनाली कुमावत और सुश्री विद्या मेनन ने अपने कोआर्डिनेशन से वर्कशॉप को ऑर्गनाइज किया।
श्री अरविंदो इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस में उद्घाटन संस्थान के अध्यक्ष डॉ. विनोद भंडारी, डॉ. मंजू भंडारी, न्यूरोलॉजी कॉन्फ्रेंस की आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. वसंत डाकवाले और आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य डॉ. परेश सोधिया द्वारा किया गया।
एनएसआईकॉन के इतिहास में पहली बार एक ही दिन में न्यूरोलॉजी की सात वर्कशॉप्स एक ही स्थल पर आयोजित की गईं। यह स्वयं इस आयोजन की विविधता और व्यापकता का प्रमाण है। इन वर्कशॉप्स का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को मस्तिष्क की जटिल संरचना और आधुनिक तकनीकों के बारे में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था। 3डी इंट्रिंसिक ब्रेन एनाटॉमी सत्र में प्रतिभागियों को विशेष त्रिआयामी वीडियो के माध्यम से मस्तिष्क की संरचना, उसकी सूक्ष्म परतों और डिसेक्शन की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला। इससे भविष्य की सर्जरी में अधिक सुरक्षित और सटीक दृष्टिकोण अपनाने में सहायता मिलेगी। दूसरी महत्वपूर्ण वर्कशॉप बोटुलिनम टॉक्सिन थेरेपी पर केंद्रित थी। इसमें विशेषज्ञों ने बताया कि चोट या लकवे के कारण उत्पन्न मांसपेशीय अकड़न को बोटॉक्स थेरेपी द्वारा किस प्रकार कम किया जा सकता है और इससे मरीजों के जीवन में कैसे सुधार आता है।
एंडोवैस्कुलर वर्कशॉप में बिना चीरा लगाए किए जाने वाले आधुनिक उपचारों की जटिलताओं, तकनीकी बारीकियों और नवीनतम तरीकों की जानकारी केस स्टडी के माध्यम से दी गई। ब्रेन हेमरेज के मरीजों के पुनर्वास पर आधारित विशेष व्याख्यान में डॉ. अपूर्व पौराणिक ने विस्तृत जानकारी दी। इसके लिए मुंबई से विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया था। एंडोस्कोपिक स्पाइन और एंडोस्कोपिक स्कल सत्रों में बताया गया कि आधुनिक दूरबीन तकनीक की सहायता से रीढ़ और मस्तिष्क के जटिल ऑपरेशन को किस प्रकार अधिक सुरक्षित तथा कम आक्रामक बनाया जा सकता है। माइक्रोवैस्कुलर एनास्टोमोसिस वर्कशॉप में अत्यंत सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को जोड़ने की तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया। कॉग्निटिव रिहैबिलिटेशन सत्र में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया कि ब्रेन इंजरी के बाद मानसिक कार्यक्षमता को बहाल करने के लिए किन उपायों और चरणों की आवश्यकता होती है। कुल मिलाकर एक सौ पचास से अधिक प्रतिभागियों ने इन सभी सात वर्कशॉप्स में हिस्सा लिया जिससे प्री कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स और भी व्यापक और प्रभावी सिद्ध हुईं।
डॉ. वसंत डाकवाले, ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन ने कहा कि, “एनएसआइकॉन 2025 की भावना यही है कि विज्ञान और मानवीय संवेदनाएँ साथ मिलकर आगे बढ़ें। नर्सेज़, डॉक्टरों और प्रशिक्षुओं के लिए आयोजित आज के सत्र यह दर्शाते हैं कि ब्रेन और स्पाइन केयर तब ही पूर्ण होती है जब इसकी नींव मजबूत प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और संवेदनशील देखभाल पर आधारित हो। एनएसआइकॉन 2025 की सभी सातों वर्कशॉप्स का समन्वयन निमहांस के अग्रणी डॉक्टर डॉ. द्वारकानाथ श्रीनिवास के मार्गदर्शन में हुआ। 3D इंट्रिंसिक ब्रेन एनाटॉमी वर्कशॉप का संचालन डॉ. अभिधा शाह और डॉ. सुखदीप झंवर ने किया। फैकल्टी में डॉ. मंजूनाथ मोतांगी और डॉ. परेश सोधिया शामिल रहे। एंडोस्कोपिक स्पाइन वर्कशॉप का समन्वयन डॉ. अशेष टंडन ने किया और प्रशिक्षण में डॉ. राकेश लुहाना तथा डॉ. अंकित गुप्ता ने योगदान दिया। एंडोस्कोपिक स्कल बेस वर्कशॉप का संचालन डॉ. जसकरण गोसल और डॉ. चंद्रशेखर देवपूजारी ने किया। फैकल्टी पैनल में डॉ. रजनीश कछारा और डॉ. राघवन आयंगर शामिल रहे। एंडोवैस्कुलर वर्कशॉप का संचालन डॉ. श्रीनिवासन परमसिवम ने किया और फैकल्टी में डॉ. निशांत भार्गव ने नवीनतम तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया। बोटुलिनम टॉक्सिन इन न्यूरोलॉजी वर्कशॉप का नेतृत्व डॉ. मोहित भट्ट ने किया। उनके साथ डॉ. रूपा राजन, डॉ. ए. इलावरासी और डॉ. मोनिका बागुल ने विभिन्न न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में बोटुलिनम टॉक्सिन के उपयोग पर प्रशिक्षण दिया। कॉग्निटिव रिहैबिलिटेशन वर्कशॉप में डॉ. अपूर्व पुराणिक कोऑर्डिनेटर थे और फैकल्टी में डॉ. उर्वशी शाह तथा डॉ. श्वेता कडाबा ने आधुनिक तकनीकों पर जानकारी प्रदान की। माइक्रोवैस्कुलर एनास्टोमोसिस वर्कशॉप का संचालन डॉ. शाश्वत मिश्रा और डॉ. अमोल रहेजा ने किया। फैकल्टी में डॉ. राकेश गुप्ता और डॉ. ज़फर शेख ने अत्यंत सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को जोड़ने की तकनीक का प्रशिक्षण दिया।”
इस अवसर पर एनएसआईकॉन 2025 के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. जे. एस. कठपाल ने कहा कि, “प्री कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसा प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है जो सीधे मरीजों की बेहतर देखभाल में परिवर्तित हो सके। इंदौर में एक ही दिन में सात वर्कशॉप्स का सफल आयोजन हमारी टीम की प्रतिबद्धता और प्रतिभागियों के उत्साह का स्पष्ट प्रमाण है।”
11 से शुरू होगी मुख्य कॉन्फ्रेंस
11 से 14 दिसंबर तक एनएसआईकॉन 2025 की मुख्य वैज्ञानिक कॉन्फ्रेंस ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में ही आयोजित होगी। उद्घाटन 11 दिसंबर को दोपहर बारह बजे माननीय राज्यपाल श्री मंगुभाई सी पटेल द्वारा किया जाएगा। चार दिनों तक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्लेनरी टॉक्स, पैरेलल सेशंस, वर्कशॉप्स और वैज्ञानिक चर्चाओं के माध्यम से ब्रेन और स्पाइन केयर से जुड़ी उभरती चुनौतियों, नवीन तकनीकों और भविष्य की दिशा पर गहन विचार विमर्श होगा। आज हुए प्री कॉन्फ्रेंस प्रशिक्षण सत्र यह स्पष्ट करते हैं कि एनएसआईकॉन 2025 केवल एक कॉन्फ्रेंस नहीं है। यह उन सभी चिकित्सा पेशेवरों के लिए प्रेरणा और ज्ञान का केंद्र है जो विज्ञान को वास्तविक जीवन में लागू करते हैं और मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं।


