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देश की अखण्डता के लिये सबसे पहला बलिदान डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का हुआ
राष्ट्रीय महासचिव श्री कैलाश विजयवर्गीय ने फेसबुक लाईव से ‘‘डॉ. श्यामाप्रसादजी मुखर्जी के राजनीतिक मूल्यों पर वर्तमान प्रासंगिकता’’ विषय पर व्याख्यान दिया
इंदौर. भाजपा कार्यकर्ताओं ने विजयनगर चौराहा स्थित डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनकी 67 वी पुण्यतिथि बलिदान दिवस के रूप में मनाई। शाम को डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के राजनीति मूल्यों पर वर्तमान प्रासंगिकता विषय पर भाजपा राष्ट्रीय महासचिव श्री कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा कार्यालय इंदौर से वर्चुअल संवाद व फेसबुक लाईव से हजारों कार्यकर्ताओं को व्याख्यान देते हुए डॉ. मुखर्जी के जीवन से जुड़े कई संर्दभों को बताया।
भाजपा राष्ट्रीय महासचिव श्री कैलाश विजयवर्गीय ने भारत माता की जयघोष करते हुए भारत चीन सीमा पर हुए संघर्ष में शहीद हुए सेना के जवानों को श्रद्धांजलि दी। आपने कहा कि इस पुण्य भूमि को भारत माता कहते है। घर एवं सामान का बंटवारा हो सकता है, लेकिन कभी मां का बंटवारा नहीं होता है, जब इस देश ने आजादी के पूर्व भारत मां का विभाजन होते देखा, यह पीड़ा पूरे देशवासियों के लिये असहनीय थी। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद जरूरी हुआ लेकिन देश ने भारत माता के विभाजन के दुख को सहा।
आपने कहा कि देश को आजादी दिलाने में अलग-अलग विचारधारा के लोगों ने एक साथ खड़े होकर आंदोलन चलाया। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी उस समय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष थे जब उन्होंने विभाजन होने वाले भारत के नक्शे को देखा तो उन्होंने लोगों को साथ लेकर बंग बचाओं आंदोलन शुरू किया और परिणाम स्वरूप बंगाल और पंजाब को पाकिस्तान में जाने से बचाया।
जब महात्मा गांधीजी ने डॉ. मुखर्जी की नेतृत्व क्षमता को देखा तो उन्होंने नेहरूजी से कहा कि इन्हें मंत्रीमंडल में स्थान दिया जाना चाहिए तत्पश्चात डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी नेहरूजी के मंत्रीमंडल में मंत्री बने, लेकिन नेहरूजी की तुष्टीकरण की नीति के कारण डॉ0 श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके पश्चात उस समय के हमारे शीर्ष नेतृत्व ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, और आज वही जनसंघ विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी के रूप में कार्य कर रहा है। इसके पीछे हमारी अखंड विचारधारा है।
आपने कहा कि डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। उनके जैसे राष्ट्र सेवक होना संभव नहीं है। तत्कालिक सरकार की गलती से कश्मीर में इस तरह की विघटनकारी शक्तियों ने जन्म लिया एवं आधा कश्मीर पड़ोसी देश को चला गया।
डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी का कश्मीर के लिए किया गया संघर्ष किसी से छुपा नहीं है। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर कश्मीर को बचाने का प्रयास किया। जब नेहरूजी ने कश्मीर में धारा 370 लगाने का निर्णय लिया तब डॉ मुखर्जी ने नेहरूजी का पूरजोर विरोध करते हुए आंदोलन किया और एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नही चलेंगे।
इस आंदोलन में जम्मू कश्मीर की जेले आंदोलनकारियों से भर दी गई। इसी बीच संदिग्ध परिस्थतियों में डॉ. मुखर्जी की मृत्यु हुई। देश की एकता और अखण्डता के लिये सबसे पहला बलिदान डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का हुआ।
हम सभी के मन में हमेशा एक प्रश्नवाचक चिन्ह रहता था क्या धारा 370 कभी कश्मीर से हट सकती है, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्रजी मोदी और गृहमंत्री अमितजी शाह जिनकी सोच में कभी अंसभव शब्द नहीं है। इतना बड़ा निर्णय और इतनी आसानी से हल हो जायेगा। वैधानिक तरिके से कश्मीर से धारा 370 और 35 ए हटाई गई यह मोदीजी और शाहजी ही कर सकते है। यही सच्ची श्रद्धांजलि डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी को दी गई।
आपने कहा कि अभी हाल ही में जिस तरह चीन के द्वारा सीमा पर हमारे जवानों के साथ घटना घटी उस पर हमारे प्रधानमंत्रीजी ने कहा दिया है जो भारत की तरफ आंख उठायेगा वो समझ ले। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्रजी मोदी भी डॉ. मुखर्जी के विचारों से सहमत होकर कार्य करते है।
कोरोना महामारी के इस संकटकाल में भी क्षति हुई लेकिन जिस तरह पूरी दुनिया में क्षति हुई उतनी क्षति हमारे देश में नहीं हुई, और यह मोदीजी के नेतृत्व का ही परिणाम है। सही समय पर सही निर्णय लेने वाला व्यक्ति दुनिया की आंख का तारा बन जाता है। राजनीति में संकल्प लेना और उसे पूरा करना बहुत बड़ा काम होता है, चाहे डॉ. मुखर्जीजी हो या मोदीजी हम सब विचारधारा के लिये काम करते है। विचार परिवार के साथ काम करने से सफलता भी मिलती है।
आपने कहा कि जनसंघ की स्थापना से लेकर आज तक राजनीतिक मूल्यों पर वर्तमान प्रासंगिकता के निर्णयों के साथ कार्य करते आ रहे है। कश्मीर से धारा 370 और 35ए का हटना डॉ. मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि है।
कार्यक्रम में संभागीय संगठन मंत्री श्री जयपालसिंह चावड़ा ने कहा कि आज बहुत गौरवानंवित और रूमांचित करने वाला दिन है। भारत के इतिहास में धारा 370 का विरोध करने वाले, देश के लिये अपने प्राण न्यौछावर करने वाले डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी हमेशा अमर रहेंगे। डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी प्रारंभ से ही प्रखर बुद्धि वाले व श्रेष्ठ वक्ता थे। उन्होंने अल्पायु में ही विद्याध्ययन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएं अर्जित की थी। डॉ मुख़र्जी सच्चे अर्थों में मानवता के उपासक और सिद्धांतवादी थे ।
सांसद श्री शंकर लालवानी ने धारा 370 और 35 ए हटने के पूर्व की तैयारियों को विस्तारपूर्वक बताया। नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे ने मंचासीन अतिथियों का भाजपा का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया और स्वागत भाषण देते हुए डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कार्यालय पर विधायक रमेश मेंदोला, महेन्द्र हार्डिया, आकाश विजयवर्गीय, प्रदेश उपाध्यक्ष सुदर्शन गुप्ता, गोपीकृष्ण नेमा, मधु वर्मा, सूरज केरो, घनश्याम शेर, कमल बाघेला, जयंत भिसे, जयदीप जैन, जेपी मूलचंदानी, सुमित मिश्रा, हरप्रीतसिंह बक्षी, नानुराम कुमावत संदीप दुबे,, मुकेश मंगल, कमल वर्मा, सविता पटेल, सविता अखण्ड, देवकीनंदन तिवारी, प्रकाश राठौर, राजेश शिरोडकर, मंजूर एहमद, मांगीलाल रेडवाल, मनस्वी पाटीदार, लक्ष्मीनारायण साहू सहित अपेक्षित पदाधिकारी व प्रदेश पदाधिकारी उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन नगर उपाध्यक्ष जयंत भिसे ने किया एवं अंत में आभार आई.टी.सेल व सोशल मीडिया प्रभारी अतुल बघेरवाल ने माना। समापन के पूर्व चीन सीमा पर शहीद हुए जवानों और खरगौन विभाग प्रचारक अजय पाटीदार की दुखद निधन पर मौन श्रद्धांजलि दी।


