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सर्जरी और ट्रांसप्लांट के बाद की डाइट के बारे में दिए सुझाव
डाइट विशेषज्ञों की 51 वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस का शुभारम्भ
इंदौर. बच्चे के गर्भ में आकार लेने से दुनिया में आने, धीरे-धीरे विकास करने और उम्र के विभिन्न पड़ाव पार करके वृद्धावस्था तक पहुँचने की यात्रा प्रकृति ने बहुत ही संतुलित तरीके से रची है. भोजन इस रचना का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है जो कि जीवन जीने के लिए जरूरी है. लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित दिनचर्या ने हमारे भोजन को ही सबसे ज्यादा असंतुलित किया है.
यही कारण है कि कम उम्र में कई गंभीर बीमारियां लोगों को शिकंजे में ले रही हैं. सामान्य स्थिति हो, कोई बीमारी या सर्जरी, हमारे भोजन को संतुलित और पौष्टिक होना जरूरी है और इसका सही मैनेजमेंट भी आवश्यक है. इसी विचार के साथ इंडियन डाइटेटिक एसोसिएशन की 51 वीं वार्षिक राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आज यहाँ आगाज़ हुआ. इस तीन दिवसीय आयोजन की थीम ‘न्यूट्रिशन: फ्रॉम इवोल्यूशन टू रिवोल्यूशन प्रिपेयरिंग फॉर द फ्यूचर- टुगेदर’ है.
कैंसर से लड़ाई में डाइट का महत्व:
कॉन्फ्रेंस के पहले दिन टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई से आये श्री शिवशंकर टी ने न केवल कैंसर के इलाज के दौरान किये जाने वाले डाइट प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया। बल्कि इस दौरान होने वाले दवाइयों के साइड इफेक्ट्स के लिहाज से भी डाइट परिवर्तन के लिए सजग रहने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि पोषणयुक्त भोजन की भूमिका उस समय से ही और महत्वपूर्ण हो जाती है जब हम बीमार होते हैं।
जितनी जल्दी इस बीमारी का पता चल जाता है, उतना ही नुकसान कम होता है। पहले की तुलना में आज कई ऐसी सुविधाएं हैं जिनका लाभ पेशेंट्स को मिल सकता है। हम कोशिश करते हैं कि पेशेंट हुआ नुकसान कम से कम हो सके।
चूंकि कैंसर पेशेंट की स्थिति इलाज के दौरान हर एक घण्टे में बदलती रहती है, इसलिए उसे अपनी डाइट को भी इसी हिसाब से मैनेज करना चाहिए। अगर आप संतुलित और पौष्टिक डाइट से शरीर को मजबूत रखेंगे तो ट्रीटमेंट के रिजल्ट्स भी अच्छे पा सकेंगे। कैंसर ट्रीटमेंट के 3-6 माह बाद नॉर्मल डाइट शुरू कर सकते हैं लेकिन यह डॉक्टर और डाइटीशियन की सलाह से मैनेज करें और पौष्टिक तथा ताजा खाना खाएं।
हेल्दी भोजन के लिए टेस्ट डेवलप करें। मैदा, शकर, फ़्राईड फ़ूड आदि से दूर रहें। उन्होंने यह भी कहा कि भारत मे पहली बार ऑन्को न्यूट्रीशन पर खास तौर पर वर्कशॉप हो रही है यह एक बहुत अच्छा संकेत है।
ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद डाइट:
लिवर, हार्ट और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों के प्रत्यारोपण के पहले और बाद की डाइट को लेकर सुश्री ज़मरूद पटेल, कन्सलटेंट डाइटीशियन,मुम्बई ने कहा कि अगर ट्रांसप्लांट से पहले आपकी डाइट अच्छी नही होगी तो ट्रांसप्लांट के रिजल्ट्स पर इसका बुरा असर दिखेगा। सर्जरी के 3-6 महीने बाद सामान्य भोजन ले सकते हैं लेकिन जो परहेज डॉक्टर और डाइटीशियन ने बताया है उसे जीवनभर पालन करने से स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। जंक फूड को हेल्दी फ़ूड में बदलने की आदत डालें जैसे समोसे को आलू की जगह पनीर या स्प्राउट्स से भरें, नमक और शकर कम कर दें और तेल की मात्रा भी घटा दें।
बैरियाट्रिक सर्जरी के बाद का डाइट कंट्रोल:
मणिपाल हॉस्पिटल्स, दिल्ली से आये सर्जन,डॉ.अरुण प्रसाद ने बताया कि मोटापे के पीछे मूल कारण डाइट और जेनेटिक्स होते हैं। बहुत भूखे रहने या क्रेश डाइटिंग करने से भी नुकसान होता है और जरूरत से ज्यादा खाने से भी। बैरियाट्रिक सर्जरी का विकल्प हम तब अपनाते हैं जब वजन कम करने के बाकी सारे रास्ते बंद हो चुके होते हैं। कोई भी सर्जरी रिस्क से परे नही हो सकती, इसलिए इसे बेवजह अपनाने से बचना चाहिए। यही नहीं सर्जरी के बाद डाइट की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। ध्यान न रखने पर तकलीफ फिर उभर सकती है।
कैलिफोर्निया,यूएस से आये बैरियाट्रिक सर्जन डॉ. माल फोबी ने इस बात को स्पष्ट किया कि एक बैरियाट्रिक सर्जन की बैरियाट्रिक डाइटीशियन से क्या अपेक्षा होती है. उन्होंने कहा कि वे पिछले 40 वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं और टाइप 2 डाइबिटीज पीड़ित होने के अलावा खुद भी इस सर्जरी से गुजर चुके हैं। उन्होंने पाया है कि विशेषतौर पर भारतीय डाइट का इस सर्जरी के परिणामों पर अच्छा असर पड़ता है।
चूंकि अधिकांश भरतीय शाकाहारी होते हैं इसलिए सर्जरी के बाद उनके लिए सलाद, सब्जियों आदि द्वारा पोषण पाना आसान हो जाता है। कोई भी व्यक्ति नियमित व्यायाम, डाइट और स्वस्थ जीवनशैली द्वारा सामान्य मोटापे को कंट्रोल कर सकता है। अगर आपका बीएमआई 27 या इससे ज्यादा है या मोटापे की वजह से कोई बड़ी समस्या है तो ही डॉक्टर से सर्जरी के लिए सलाह लें।
वर्कशॉप में बैरियाट्रिक सर्जरी के क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं और नई तकनीकों के बारे में डॉ. मोहित भंडारी ने प्रेजेंटेशन के जरिए बताया। उन्होंने बताया कि किस तरह नई तकनीक का प्रयोग कर मोटापे के केसेस में पेट को सिकोड़ा जाता है औए इससे लंबे समय तक न केवल मोटापे को कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है बल्कि डाइबिटीज के रोगियों को डायबिटीज से भी छुटकारा मिल जाता है। इसके बावजूद सर्जरी के बाद डाइट और लाइफस्टाइल को लेकर सावधानी रखना जरूरी है।
कार्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी देते हुए सुश्री शीला कृष्णन स्वामी, नेशनल प्रेसिडेंट ऑफ इंडियन डाइटिक एसोसिएसन ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में हम स्पोर्ट्स न्यूट्रीशन, कीटोजेनिक डाइट, डाइट के क्षेत्र में रिसर्च और सामुदायिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर भी बात की जाएगी। साथ ही लोगों तक इस जानकारी का प्रसार करना हमारा उद्देश्य रहेगा कि बिना सोचे-समझे किसी भी डाइट को अपनाने की बजाय किसी क्वालिफाइड डाइटीशियन से सलाह लें।
30 सितंबर से 2 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 4.30 बजे तक चलने वाली इस तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन शहर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में हो रहा है. कॉन्फ्रेंस की ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी, डाइटीशियन सुश्री प्रीति शुक्ला के अनुसार-‘कॉन्फ्रेंस के पहले दिन हमने गंभीर बीमारियों के संदर्भ में स्पेशल डाइट मैनेजमेंट के बारे में विशेषज्ञों से जानकारी हासिल की. इस अवसर पर एक दिन के विशेष सर्टिफिकेशन कोर्स के प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए।’


