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संकीर्ण सोच के दायरों को तोड़कर विश्व को नए नजरिए से देखना चाहिए
डीपीएस में इंटर कल्चरल लर्निंग एवं ग्लोबल काम्पिटेंस’ विषय पर कार्यशाला में बोलीं विशेषज्ञ
इंदौर. दूसरी संस्कृतियों के प्रति उदारता, सांस्कृतिक भिन्नता के प्रति खुली सोच एवं विश्लेषणात्मक ढंग से सीखने की ललक ही हमारे भीतर वैश्विक सामंजस्य की सक्षमता विकसित कर सकती है। हमें अपनी संकीर्ण सोच के दायरो को तोड़कर विश्व को नए नजरिए से देखना चाहिए। बहुमुखी आयामों से विश्लेषण करना चाहिए।
ये विचार एएफएस इंदौर चैप्टर कंसल्टेंट श्रीमती सरिता बधवार ने दिल्ली पब्लिक स्कूल में रखे। वे यहां निपानिया और राऊ कैंपस के शिक्षकों को इंटर कल्चरल लर्निंग एवं ग्लोबल काम्पिटेंस विषय पर आयोजित कार्यशाला में संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि एसे कार्यक्रम ही वैश्विक स्तर के विद्यार्थियों और विद्यालयों में बेहतर सामन्जस्य स्थापित कर सकते हैं, जो कि आज के वैश्विक दौर की प्रमुख आवश्यकता है। सभी विद्यालय अपने विद्यार्थियों को इस प्रकार के अवसर प्रदान कर उत्साहित करें ताकि वे विश्व में अपनी पहचान कायम करने के साथ-साथ उन्नत तकनीकों से वाकिफ हो सकें।
साथ ही अपनी विशेषताओं का प्रदर्शन कर उन्हें निखार सकें। एएफएस के माध्यम से हम किशोर और युवा विद्यार्थियों को जोड़कर विश्व शांति में सहयोग दे सकते हैं। ग्लोबल कॉम्पिटेंस कार्यशाला में ऑडियो-विजुअल के सहारे से प्रशिक्षण दिया गया।
विभिन्न मनोवैज्ञानिक तथ्यों की विस्तृत व्याख्या करते हुए श्रीमती सरिता ने शिक्षकों को अपने अध्यापन के माध्यम से विद्यार्थियों में वैश्विक सामंजस्य की क्षमता विकसित करने की प्रेरणा एवं प्रशिक्षण दिया। उनके विचारानुसार बाधाएं ही अवसरों का प्रवेश द्वार है। हम स्वयं को सीमाओं के बंधनों से मुक्त कर, जीवन मूल्यों को अपनाकर विश्व में अपनी पहचान सहजता से कायम कर सकते हैं।
कार्यशाला के आरंभ में प्राचार्य श्री अजय के. शर्मा द्वारा पौधा प्रदान कर श्रीमती सरिता का स्वागत किया गया। उप-प्राचार्य श्रीमती ज्योति नांबियार एवं हेड मिस्ट्रेस (मुख्याध्यापिका) श्रीमती माधवी भाले भी इस अवसर पर उपस्थित थे। कार्यशाला में प्रश्नोत्तरी द्वारा भिन्न-भिन्न दृष्टिकोणों पर प्रकाश डाला गया। हाई स्कूल हॉस्टिंग प्रोग्राम एवं एकेडमिक इयर प्रोग्राम का परिचय दिया गया। प्रांतीय एवं अंतर्राष्ट्रीय ए.एस.एफ. ग्रुप एक्सचेंज प्रोग्राम की विस्तृत जानकारी दी गई।


