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शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा होगा सोलह कलाओं से पूर्ण
डॉ श्रद्धा सोनी

अश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा शरद पूर्णिमा कहलाती है. शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है. इस बार शरद पूर्णिमा का पर्व 24 अक्टूबर बुधवार को मनाया जाएगा. इस व्रत में निशीथ व्यापन पूर्णिमा ग्रहण करना चाहिए जो पूर्णिमा रात के समय रहे वहीं ग्रहण करना चाहिए।
शरद पूर्णिमा के व्रत को कोजा गार व्रत भी कहते हैं क्योंकि लक्ष्मी जी को जागृति करने के कारण इस व्रत का नाम कोजा गार पड़ा ।
इस दिन लक्ष्मी नारायण महालक्ष्मी एवं तुलसी का पूजन किया जाता है।
पूर्णिमा की चांदनी में अमृत का वास रहता है और इसलिए उनकी किरणों से अमृत एवं आरोग्य की प्राप्ति सुलभ होती है ।
बताया जाता है कि इस दिन ब्रज में भगवान श्री कृष्ण ने इसी तिथि को रासलीला की थी इस कारण इस पर्व को ब्रज में विशेष उत्साह से मनाया जाता है
इसका विधान इस दिन प्रातकाल अपने आराध्य देव को सुंदर वस्त्र आभूषण से सुशोभित करके उनका विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए
अर्थ रात्रि के समय गो दूध से बनी खीर का भोग लगाना चाहिए ।
खीर 1 पात्र में रखकर रात में खुली चांदनी में रखनी चाहिए ।
इससे रात्रि के समय चंद्रमा की किरणों द्वारा अमृत गिरता है।
पूर्णिमा के दिन ही लक्ष्मी पूजन किया जाता है इस दिन रात्रि के समय गौ घृत पूरित और गंध पुष्प आदि से पूरित एक 100 आठ दीपक ओं को प्रज्ज्वलित करके देव मंदिरों में बाग बगीचों में तुलसी के पास रखना चाहिए ।
पूर्णिमा को ही कोजा व्रत किया जाता है इसी दिन भगवती महालक्ष्मी रात्रि के समय है देखने के लिए निकलती है कि कौन जाग रहा है जो जाग रहा होता है उसे धन धान्य से परिपूर्ण कर देती हैं।
लक्ष्मी जी को जागृति करने के कारण इस व्रत का नाम कोजा गार पड़ा
पूर्णिमा की रात्रि में श्री सूक्त लक्ष्मी सूक्त का पाठ करना विशेष लाभदायक रहता है
कमलगट्टा गौ घृत बेल फल बिल पतरी खीर द्वारा हवन करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं
एवं सुख यस कीर्ति लाभ धन-धान्य प्रदान करती हैं पूर्णिमा की रात्रि में महालक्ष्मी जी की पूजन अवश्य करना चाहिए
सौभाग्यवती स्त्रियां शरद पूर्णिमा की शाम के समय तुलसी का पूजन करती हैं
एवं डेढ़ पाव मावा एवं डेढ़ पाव शकर के 6 लड्डू बनाकर भगवान जी की पूजन करती हैं
इन लड्डुओं को एक भगवान को एक पति को एक गर्भवती महिला को एक सखी को एक ग्वाल बालों को एक तुलसी को एक स्वयं ग्रहण करती हैं
रोगियों के लिए शरद पूर्णिमा की रात्रि विशेष लाभदायक है रात्रि के समय खुले में बैठकर भगवान का पूजन किया जाए तो रोग मुक्त हो जाते हैं ।


