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पर्वकाल में न अष्टमी तिथि न रोहिणी नक्षत्र, फिर भी जन्माष्टमी 12 अगस्त को मनेगीः आचार्य शर्मा
पर्वकाल में न अष्टमी तिथि न रोहिणी नक्षत्र, फिर भी जन्माष्टमी 12 अगस्त बुधवार को सर्वार्थसिद्धि योग में बिना भक्तों के मनेगी। अलग-अलग मतों से दो दिन पर्व मनेगा। 11 अगस्त को अर्द्ध रात्री व्यापिनी, स्मार्त मत से तो 12 अगस्त को उदयव्यापिनी अष्टमी वैष्णव मत से, मथुरा, वृन्दावन व द्वारका में 12 अगस्त बुधवार को ही जन्माष्टमी मनेगी। शासकीय अवकाश भी बुधवार को रहेगा।
यह बात मध्यप्रदेश ज्योतिष एवं विद्वत परिषद अध्यक्ष आचार्य पण्डित रामचन्द्र शर्मा वैदिक ने कही। उन्होंने कहा कि सामान्यतः जन्माष्टमी का पर्व प्रतिवर्ष दो से भी अधिक दिनों तक सम्प्रदाय भेद की मान्यता अनुसार मनाया जाता है। दो प्रमुख मत है स्मार्त व वैष्णव। स्मार्त मत में पर्व काल मे अष्टमी तिथि को महत्व दिया जाता है तो वैष्णव सम्प्रदाय के लोग सूर्योदय कालीन अष्टमी तिथि में पर्व मनाते है।
पुराणादि धर्मशास्त्रों की मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का आविर्भाव भाद्र कृष्ण अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृषभ राशि के चन्द्रमा में बुधवार को अर्द्ध रात्रि में हुआ था। इस वर्ष 11 व 12 अगस्त बुधवार को पंचांगीय स्थिति इस प्रकार है। 11 अगस्त मंगलवार को सप्तमी तिथि प्रातः 9 बजकर 06 मिनिट तक है।
उसके बाद अष्टमी प्रारम्भ होगी जो 12 अगस्त बुधवार को प्रातः 11 बजकर 15 मिनिट तक रहेगी। दोनों दिन पर्वकाल में रोहिणी नक्षत्र विद्यमान नहीं है। अतः11 अगस्त को स्मार्त व 12 अगस्त बुधवार को वैष्णव मत से जन्माष्टमी का पर्व पूरे भारत वर्ष में मनाया जावेगा।
आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि अधिकांश स्थानों पर 12 अगस्त बुधवार को यह पर्व परम्परानुसार मनेगा। 12 अगस्त को प्रातः11 .15 बजे तक अष्टमी तिथि है।बुधवार,सर्वार्थसिद्धि योग व वृषभ राशि का चन्द्रमा भी विद्यमान रहेगा ,किन्तु पर्वकाल में न अष्टमी रहेगी न रोहिणी नक्षत्र ?
इन्दौर, मध्य के साथ ही मथुरा, वृंदावन व द्वारका में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 12 अगस्त बुधवार को ही मनाया जावेगा। जगननाथपुरी में 11 अगस्त को तो ऋषिकेश में 13 को मनेगा।
इतिहास में पहली बार वैष्विक महामारी कोविड19 के चलते यह पर्व बिना भक्तों के मनेगा।
केवल पंडे पुजारी ही भगवान के जन्मोत्सव को मनाएंगे। यह भी एक विडम्बना ही है। भगवान से प्रार्थना है कि इस महामारी का शीघ्र ही अंत कर देश मे सर्वत्र आनंद ही आनंद कर फिर देशवासियों को ऐसे दिन नहीं देखना पड़े।


